इसरो ने ‘व्योममित्र’ को दुनिया के समक्ष पेश किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी गगनयान परियोजना के तहत बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘व्योममित्र’ को दुनिया के समक्ष पेश किया। ‘व्योममित्र’ एक ‘हाफ ह्यूमनॉइड’ (इंसानी) रोबॉट है जिसे इसरो द्वारा गगनयान की उड़ान से ठीक पहले कुछ परीक्षणों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसरो के वैज्ञानिक सैम दयाल ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘अंतरिक्ष में व्‍योमम‍ित्र एक मानव शरीर के क्रियाकलापों का अध्‍ययन करेगा और उसकी रिपोर्ट हमें भेजेगा। इसे एक प्रयोग के तौर पर अंतरिक्ष में भेजा रहा है।’ बता दें कि भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन पर ‘गगनयान’ की उड़ान के लिए 2022 के शुरुआती महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य भारतीयों (गगनयात्रियों) को अंतरिक्ष यात्रा पर भेजकर उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है।


मानव क्रियाकलापों की नकल कर सकता है व्योममित्र


दयाल ने आगे कहा, ‘व्‍योमम‍ित्र’ एक खास तरह का रोबॉट है जो कि बात करने के साथ ही इंसानों की पहचान भी कर सकता है। यह रोबॉट अंतरिक्षयात्रियों के द्वारा किए जाने वाले क्रियाकलाप की नकल करने में सक्षम है। इस रोबॉट के पैर नहीं है जिस वजह से इसे हाफ ह्यूमनॉइड कहा जा रहा है। यह सिर्फ आगे और दाएं-बाएं झुक सकता है। अंतरिक्ष में कुछ परिक्षण के उद्देश्य से व्योममित्र को अंतरिक्ष भेजा जाएगा और यह इसरो के कमांड सेंटर से संपर्क में रहेगा।’ व्‍योमम‍ित्र न केवल बातचीत कर सकता है बल्कि लोगों को उनके प्रश्नों के उत्तर देने में भी सक्षम है। बेंगलुरु में व्योममित्र ने लोगों का अभिवादन करते हुए कहा, ‘हाय, मैं हाफ ह्यूमनॉइड (इंसानी) का पहला प्रोटोटाइप हूं।’


भारतीय वायुसेना से संंबंधित हैं चारों अंतरिक्षयात्री


इसरो चेयरमैन के. सिवन ने कहा है कि गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्षयात्रियों को जनवरी के अंत में प्रशिक्षण के लिए रूस भेजा जाएगा। इन अंतरिक्षयात्रियों की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है। केवल इतना ही बताया गया कि ये चारों भारतीय वायुसेना के परीक्षक विमानचालक हैं। 15 महीने का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नवंबर महीने से शुरू होने जा रहा है। इस अभियान के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये के खर्च होने की संभावना जताई जा रही है।


मिशन में रूस कर रहा भारत की सहायता


उल्लेखनीय है कि गगनयान अभियान के निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार, भारत द्वारा कम-से-कम तीन अंतरिक्ष यात्रियों को विभिन्न प्रकार के माइक्रो-ग्रैविटी परीक्षण के लिए 5 से 7 दिनों तक अंतरिक्ष की यात्रा पर भेजा जाएगा। इस अंतरिक्ष मिशन में रूस तीन पहलुओं से भारत की सहायता कर रहा है। गगनयान के लिए राष्ट्रीय सलाहकार समिति भी तैयार की गई है